उपनियम
1 नाम : यह विधान क्षत्रिय कल्याण सभा भिलाई-दुर्ग का कहलायेगा।
2 स्थान : महाराणा प्रताप भवन सेक्टर - 7 , भिलाई नगर, दुर्ग छत्तीदगढ।
3 वर्ष : सभा का वर्ष  1 अप्रेल से प्रारंभ होकर आगामी वर्ष के 31 मार्च तक माना जाएगा।
4 परिभाषाएं -
  1. विधान में प्रयुक्त सभा से तात्पर्य क्षत्रिय कल्याण सभा भिलाई नगर से है।
  2. विधान में प्रयुक्त कार्यकारिणी समिति से तात्पर्य सभा की कार्यकारिणी समिति है।
  3. विधान में प्रयुक्त समाज शब्द का तात्पर्य क्षत्रिय जाति से है।
  4. विधान में प्रयुक्त समाज शब्द का तात्पर्य क्षत्रिय समाज से है।
5 भाषा : सभा का समस्त कार्य हिन्दी भाषा में होगा।
6 रुप : सभा एक सामाजिक संस्था होगी जिसका राजनिति से कोई संबंध न होगा।
7 कार्य क्षेत्र ; सभा का कार्य - उचयक्षेत्र भिलाई नगर तथा भिलाई संभाग से संबंधित समस्त क्षत्रिय समाज से होगा।
8 उद्देश्य : जाति को एकता के सूत्र में पिरोकर पारस्परिक सहयोग की भावना उत्पन्न करना।

जाति के उदयहीन तथा अशिक्षित एवं अल्पशिक्षित बंधुओं की सहायता तथा मार्गदर्शन करना और उनका मानसिक व आर्थिक स्तर ऊंचा करने में सहयोग देना।

समाज की कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा, विभिन्न अवसरों पर अपव्यय आदि को रोकना एवं प्रचलीतहीन रिढियों को तोडना समाज की भलाई, उत्थान एवं प्रतिष्ठा वृद्धि के लिये कार्य करना।

समाज के कल्याण एवं प्रगति के लिये सर्व प्रकार की प्रतिभूतियां, चल एवं अचल संपत्तियों का दान, चन्दा, क्रय अथवा हस्तान्तरण द्वारा प्राप्त करना।

समाज के कल्याण एवं उत्थान के पथ में समाज अथवा उसके किसी वर्ग के पक्ष में सभा की प्रतिभूतियां, चल एवं अचल संपत्तियों का दान, चन्दा, विक्रय अथवा हस्तान्तरण का कार्य करना।

समाज कल्याण में शिक्षात्मक एवं सामाजिक साहित्य के वितरण के साथ शैक्षणिक एवं व्यवसायिक प्रशैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना तथा उनके व्यवस्थापन का कार्य करना।

सदस्यों के आध्यात्मिक उत्थान के लिये मंदिर का निर्माण करना एवं पूजा, अर्चना, उपासना, सत्संग तथा योग आदि का आयोजन करना।

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कार्यकारिणी समिति का गठन : कार्यकारिणी समिति में पदाधिकारियों एवं सदस्यों सहित कुल 19  सदस्य होंगे। वे सदस्य निम्न प्रकार होंगे :-

  • अध्यक्ष     -    1
  • उपाध्यक्ष    -    2
  • मंत्री    -    1
  • सहायक मंत्री 2   -   
  • कोषाध्यक्ष    -    1
  • संगठन मंत्री    -1   
  • प्रचार मंत्री    -    1
  • साधारण सदस्य    - 8  
  • मनोनीत सदस्य    -    2

कुल    -    19

10 कार्यकारिणी सदस्य का चुनाव
  • कार्यकारिणी के सदस्यों का चुनाव मनोनीत सदस्य को छोडकर आम सभा द्वारा सीधे मतदान द्वारा होगा। प्रत्येक सदस्य को कार्यकारिणी के लिये मनोनीत सदस्य को छोडकर निर्धारित संख्या 17  के लिये मतदान करना अनिवार्य  होगा। 17 से कम या ज्यादा के लिये मतदान करने पर विशेष मतपत्र निजस्त माना जाएगा। मनोनीत सदस्यों का चुनाव कार्यकारिणी समिति करेगी। ऎसे सदस्य क्षत्रिय समाज में से चुने जायेंगे जिनगी अधिकतम सीमा 2 होगी।
  • पदाधिकारियों का चुनाव कार्यकारिणी के सदस्य आपस में मतदान द्वारा करेंगे। किसी भी पदाधिकारी को अविस्वास प्रस्ताव लाकर 3/4 बहुमत के निर्णय से उसे पद से हताया जा सकता है।
  • कार्यकारिणी के सदस्यों तथा पदाधिकारियों के चुनाव में एक सदस्य को प्रत्येक दशा में केवल एक ही मत देने का अधिकार होगा।

 

11 कार्यकारिणी समिति के अधिकार तथा कर्तव्य
  • सभा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिये समिति पूर्ण उत्तरदायी होगी।
  • आम सभा द्वारा निर्देशित एवं निश्चित योजनाओं को सुचारु रुप देना।
  • विधान में संशोधन करना, अतिरिक्त नियम जोडना तथा विधान की किसी धारा को निकालना, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि विधान में संशोधन एवं परिवर्तन तभी संभव होगा जबकि इस संबंध में आम सभा का निर्णय उसके पक्ष में होगा।
  • यह देखना होगा कि सभा का प्रत्येक सदस्य सभा के विधान उसकी नितियों तथा उसके नियमों का पालन करता है अथवा नही।
  • किसी सदस्य के विधान के नियमों के उल्लंघन तथा सबा के उद्देश्य पूर्ति के प्रतिकूल काम करने की अवस्था में उस व्यक्ति को सद्स्यता से निलम्बित करना तथा आवस्यक कार्यवाही हेतु आमसभा को सिफ़ारिस करना।
  • समिति के आय व्यय का संचालन करना।
  • साधारण आम सभा द्वारा स्वीकृत बजट के अन्तर्ग्त व्यय करना।
  • कार्य कारिणी समिति के अधिकारी एवं मनोनीत सदस्यों का चुनाव करना।
  • सबा के लिये समस्त चल एवं अचल संपत्तियों का दान, चन्दे की प्राप्ति प्रबंध एवं उनका नियोजन करना।
  • सभा के उद्देश्यों के पूर्ति केलिये उप समितियों का गठन करना। सभी उप- समितियां कार्यकारिणी समिति के प्रति उत्तर्दायी होगी।

 

12 समितियों के पदाधोकारियों के अधिकार एवं कर्तव्य

अध्यक्ष

  • साधारण आम सभा तथा समिति की बैठक की अध्यक्षता करना।
  • अध्यक्ष समिति तथा आम सभा के समस्त कार्यों के प्रशासन के लिये उत्तरदायी होगा।
  • समिति तथा आम सभा की बैठक को बुलाने की स्वीकृति देना।
  • आम सभा अथवा समिति में चुनाव के अतिरिक्त अन्य किसी विषय पर निर्णय होने के समय दोनों पक्षोम में मत बराबर आने अवस्था में अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा।
  • बैंक से समिति अथवा सभा का धन निकालने के मंत्री के साथ संयुक्त हस्ताक्षर करना।
  • आमसभा तथा समिति द्वारा निर्मित प्रस्तावों तथा विषयों पर अंतिम स्वीकृति देना।

उपाध्यक्ष

  • अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सभा का सभापतित्व एवं कर्तव्यों का पालन करना जो अध्यक्ष के अधिकार व कर्तव्य में आते हैं।
  • उन सभी कर्तव्यों का पालन करना जो तत्समय अध्यक्ष अथवा समिति द्वारा उसे सौंपे जाये।

मंत्री

  • सभा, समिति तथा बाह्य अन्य संस्थानों से आवश्यक पत्र व्यवहार आदि का माध्यम होगा।
  • अध्यक्ष की अनुमति से बैठक बुलाना लेकिन प्रतिबन्ध यह होगा कि तीन चौथाई सदस्यों की लिखित मांग पर उसे बैठक बिना अध्यक्ष के अनुमोदन के भी बुलानी होगी। सद्स्यों की एसी मांग में विचार का विषय होना आवश्यक है। यहां सदस्यों से तात्पर्य उन सदस्यों से है जो उस बैठक में मत देने के अधिकारी हैं।
  • सभा तथा कार्यकारिणी की समस्त कार्यवाहियों का लेखा जोखा रखना है।
  • सभा के समस्त वार्षिक आय-व्यय बजट कोषाध्यक्ष के साथ मिल कर स्वीकृति हेतु अध्यक्ष को प्रस्तुत करना।
  • कोषाध्यक्ष से मिलकर सभा तथा कार्यकारिणी के आय-व्यय का लेखा-जोखा करना।
  • सभा की स्वीकृति के लिये सभा का वार्षिक बजट तैयार करना।
  • उन सभी कर्तव्यों तथा अधिकारों का पालन एवं प्रयोग जो समिति अथवा सभा द्वारा उसे सौंपे गये हो।
  • वित्तसंबंधी कार्यों का उत्तरदायित्व मंत्री पर होगा।
  • सभा के एकाउन्ट को बैंक अथवा डाकघर में आपरेट करना किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि बैंक तथा अन्य कोषों से धन की प्राप्ति अध्यक्ष के संयुक्त ह्स्ताक्षरों द्वारा होगी।
  • अध्यक्ष की अनुमति पर कोषाध्यक्ष द्वारा धन का भुगतान करना।

सहायक मंत्री

  • मंत्री के कार्यों में सहायता देना।
  • मंत्री की अनुपस्थिति में मंत्री पद का प्रतिनिधित्व करना।
  • समस्त अधिकारों  एवं कर्तव्यों का पालन जो मंत्री को समिति अथवा सभा द्वारा सौंपे गये हो।

कोषाध्यक्ष

  • समिति अथवा सभा के लिये समस्त दान, चन्दों, चल अथवा अचल सम्पत्तियों को प्राप्त करना एवं रसीद देना।
  • मंत्री की सिफ़ारिस पर धन का भुगतान करना किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि एक माह के अंदर कोई भी सौ रुपये से अधिक का भुगतान अध्यक्ष की पूर्व स्वीकृति के बिना अमान्य होगा।
  • मंत्री के साथ मिलकर समस्त आय व्यय का लेखा जोखा रखना।
  • समिति तथा सभा के आय के धन को बैंक में जमा करना। कोषाध्यक्ष कुछ धन अपने पास रख सकता है। इस धन की अधिकतम सीमा तीन हजार रुपये होगी।
  • आय व्यय के लेखा को अंकेक्षक के समक्ष निरीक्षण हेतु प्रस्तुत करना।

संगठन तथा प्रचार मंत्री

  • सभा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिये समाज को संगठित करना।
  • उन समस्त अधिकारों तथा कर्तव्यों का पालन करना जो तत्समय समिति तथा सबा द्वारा उसे सौंपे गये हों।

 

13 आम सभा के अधिकार एवं कर्तव्य
  • सबा के सदस्यों की पूर्ति के लिये निति निर्धारित करना।
  • उद्देश्यों की पूर्ति के लिये समिति का मार्ग दर्शन करना।वार्षिक आय-व्यय के बजट को पास करना।
  • किसी सदस्य द्वारा सभा के नियमों का उल्लंघन करने अथवा सभा के उद्देश्यों एवं हितों के प्रतिकूल कार्य करने की अवस्था में समिति के सिफ़ारिश पर उस व्यक्ति के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करना। इस प्रकार के व्यक्ति की सदस्यता समाप्ति भी सम्मिलित होगी।
  • समिति का चुनाव करना तथा गंभीर आरोपों के कारण उसे भंग करना।
  • सभा की अचल सम्पत्तियों का हस्तांतर्ण, क्रय - विक्रय एवं दान करना। दान लेने को छोडकर अन्य निर्णय सभा के 3/4 मत से होना आवश्यक है।
  • विधान की धारा में संशोधन, नये नियमों को जोडना एवं किसी नियम के अलग करने में अपना निर्णय देना।
  • सभा के लेखा-जोखा की जांच के लिये अंकेक्षक नियुक्त करना।

 

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सदस्यता

  • बिना किसी लिंग अथवा धर्म के भेद-भाव से, कोई क्षत्रिय, जाति का व्यक्ति सभा का सदस्य बौ सकता है जिसमें निम्नलिखित योग्यतायें हो:-
    • जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो।
    • वह कोढी, पागल न हो।
  • सभा में निम्न प्रकार की सदस्यता होगी :-
  • साधारण सदस्यता : वह व्यक्ति जो प्रवेश शुल्क सहित एक सौ रुपये वार्षिक चन्दा एक साथ देगा। वह सभा का साधारण सदस्य होगा। किन्तु उसे मत देने का अधिकार तभी प्राप्त होगा जब वह पिछले दो वर्ष से लगातार वार्षिक चन्दा दे रहा होगा।
  • आजीवन सदस्य : वह व्यक्ति जो प्रवेश शुल्क सहित एक हजार रुपये नगद देगा वह आजीवन सदस्य कहलाएगा-उसे वार्षिक चन्दा नहीं देना होगा।
  • संरक्षक सदस्य : वह व्यक्ति जो प्रवेश शुल्क सहित 25001.00 /- रुपये की राशि नगद देगा वह आजीवन सदस्य कहलाएगा - उसे वार्षिक चन्दा नहीं देना होगा।
  • मनोनीत सदस्य : सभा के लिये किसी भी रुप से हितकारी होने के कारण समिति के द्वारा ऎसे सदस्य मनोनीत किये जा सकते हैं। ऎसे सदस्योंकी अधिकतम सीमा  2 होगी और इनका कार्यकाल भी  1 वर्ष का होगा यह कोई प्रतिबंधंन नही है कि एक बार चुना गया व्यक्ति दुबारा न चुना जा सके। ऎसे व्यक्ति को वार्षिक चन्दा देना आवश्यक नही होगा।
15 सदस्यता ग्रहण करना : सदस्यता का इच्छुक व्यक्ति ( मनोनीत सदस्य को छोडकर ) प्रवेश पत्र भर कर मंत्री को दे संस्तुती देकर संयोजक की संस्तुति प्राप्त करेगा। दोनो संस्तुतियों के पश्चात प्रवेश शुल्क, वार्षिक, शुल्क कोषाध्यक्ष के पास जमा करायेगा और उनका नाम सदस्यता रजिस्तर में प्रविष्ट होगा। मनोनीत सदस्य प्रवेश पत्र नही भरेगा।
16 सदस्यों की नियोग्यता
  • कोई भी सद्स्य निम्नलिखित में से एक अथवा एक से अधिक अवस्था में सभा द्वारा सदस्यता से पृथक किया जा सकता है परन्तु सदस्यता समाप्ति करने के पहले सदस्य को कारण बताने का अवसर प्रदान करना आवश्यक होगा।
  • सभा के उद्देश्यों अथवा विधान के प्रतिकूल कार्य करने के कारण।
  • वह कोढी, पागल न हो।
  • यदि कोई सदस्यता त्याग करने के पश्चात पुनः सदस्यता ग्रहण करना चाहे तो समिति स्वीकृति प्रदान कर सकती है बशर्ते संबंधित व्यक्ति सदस्यता ग्रहण करने के दिन तक अपनी सभी बकाया राशि समिति में जमा कर दिया हो।
17 कार्यकाल
  • कार्य कारिणी के पदाधिकारी का कार्यकाल उनके चुनाव के दिनों से 2 वर्ष का होगा कि उसके पदाधिकारी तब तक कार्य करते रहेंगे जब तक कि स्थानापत्र अधिकारियों का चुनाव नही हो जाता।
  • रिक्त स्थान की पूर्ति की अवस्था में निर्वाचित व्यक्ति कार्यकारिणी के बचे हुए कार्यकाल तक कार्य करता रहेगा।
  • किसी भी पदाधिकारी का स्थान रिक्त होने की दशा में कार्यकारिणी के साधारण सदस्य में से पूर्ति की जा सकेगी एवं इस प्रकार साधारण सदस्य की संख्या कम होने से उनकी पूर्ति सभा के किसी भी सदस्य द्वारा की जा सकेगी पर दोनो दशा में सभा की अगली आम सभा की बैठक में अनुमोदित करना आवश्यक होगा।
  • कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का कार्यकाल एक ही पद पर लगातार अधिकतम दो अवधि ( टर्म ) से ज्यादा की पात्रता नही होगी।
18 बैठक
  • साधारण बैठकें : उचय कार्यकारिणी समिति तथा अआम सभा की साधारण बैठकें क्रमशः एक माह में एक बार किया जाना आवश्यक होगा।
  • आवश्यक बैठकें : उचय कार्यकारिणी समिति एसा बैठक किसी भी समय आवश्यकतानुसार कर सकती है। साधारण बैठको के लिये एक दिन की नोटिस देनी होगी-उचय नोटिस के साथ कार्यसूचि देना आवश्यक होगा।
19  विशेष आमसभा की बैठकें : मंत्री को अध्यक्ष की स्वीकृति पर अथवा 3/4 सदस्यों की लिखित मांग पर विशेष आमसभा की बैठक सदस्यों को 15 दिन की नोटिस देकर बुलाना आवश्यक होगा। आमसभा की बैठक की प्रत्येक नोटिस में बैठक की तारीख, समय एवं स्थान के साथ-साथ बैठक में संपादित होने वाले कार्यों का वुवरण लिखा होना चाहिये।
20  बैठकों की गण्पूर्ति : बैठक का कोरम समिति के सदस्यों की कुल संख्या के 1/3 जो हो माना जाएगा। बैठक के समय आधे घण्टे की प्रतिक्षा पर यदि कोरम पूरा नही होता है तो वह बैठक अध्यक्ष द्वारा किसी भी समय के लिये स्थ्गित की जा सकती है। अध्यक्ष का आदेश कार्यवाही पर लिखित में होगा स्थगनोपरान्त बैठक के लिए एजेन्डा की आवश्यकता नही होगी। एसे बैठक में कोरम की आवश्यकता नही है। किन्तु नवीन विषय सम्मिलित नही होगा एवं तीन चौथाई सदस्यों की लिखित मांग पर बुलाई गई विशेष आमसभा में गणपूर्ति कुल सदस्य संख्या का 1/2 होना आवश्यक है अन्यथा बैठक निरस्त घोषित की जा सकती है।
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बैठक की वैधानिकता

  • कोई भी बैठक इस कारण से अवैधानिक नही होगी कि उसके सदस्यों में कोई स्थान रिक्त था।
  • किसी भी सदस्य को किसी भी बओठक की कार्यवाही के विरुद्ध आपत्ति करने का अधिकार नही होगा जिसमें वह उपस्थित नही था।
  • कोई भी बैठक इस कारण से अवैधानिक नही होगी कि उसके सदस्यों में से किसी एक अथवा अधिक पर उस बैठक का नोटिस यथा विधि शामिल नही हुआ।
22 बैठकों की कार्य संचालन
  • बैठकों की कार्य संचालन क्रिया क्रमशः निम्न प्रकार होगी :-
    • अध्यक्ष समिति का आसन ग्रहण करेंगे।
    • उपस्थित सदस्यों की उपस्थिति उनके हस्ताक्षर से ली जाएगी।
    • कोरम की शर्तें विधान की धारा 20 का अनुशरण होगा।
    • बैठक की कार्यवाही मंत्री पढकर सुनायेंगे और बैठक का मत लेकर उसकी पुष्टी अध्यक्ष द्वारा की जाएगी।
  • आम सभा की बैठक में अध्यक्ष की आज्ञा से नवीन प्रस्ताव पर भी विचार हो सकेगा। आवश्यक स्थगनोपरान्त बैठक में अथवा विशेष आनसभा की बैठक में नवीन प्रस्ताव पर विचार होगा।
  • समस्त बैठको की कार्यवाही मंत्री के पास सुरक्षित रहेगी।
  • आमसभा की बैठक में अध्यक्ष की आज्ञा से नवीन प्रस्ताव पर भी विचार हो सकेगा।
  • प्रस्ताव प्रस्तुतीकरण में प्रस्ताव के अनुमोदन का मिलान आवश्यक है।
  • बैठक की निश्चित समय के पश्चात ( आधे घंटे की प्रतिक्षा के पश्चात ) अध्यक्ष की अनुपस्थिति पर, उपाध्यक्ष की भी अनुपस्थिति पर बैठक में चुना गया व्यक्ति अध्यक्ष की अनुपस्थिति तक बैठक का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • प्रत्येक विष्य पर समान रुप से केवल एक ही मत देने का अधिकार होगा।
  • पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टी हो जाने के बाद उसकी प्रमाणिता पर आपत्ति न हो सकेगी।
23 कोष

मुख्यतः निम्नलिखित आय के श्रोत रहेंगे :-

  • सदस्योम से प्राप्त शुल्क एवं अन्य सहायता राशि एवं सम्पत्ति।
  • दान - अनुदान आदि से प्राप्त चल-अचल सम्पत्ति एवं राशि।
  • सभी चल-अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय।

 

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बजट

1 अप्रेल से प्रारंभ होकर आगामी 31 मार्च तक प्रत्येक वर्ष के लिए वार्षिक प्रस्ताव कोषाध्यक्ष द्वारा मंत्री से मिलकर तैयार किये जायेंगे और कार्यकारिणी समिति के अनुमोदन के पश्चात बजट आमसभा द्वारा 30 मार्च तक जरुर पास हो जाना चाहिए।

 

25 अधिकार और कर्तव्य का प्रयोग : समस्त पदाधिकारी अपने अधिकार एवं कर्तव्य का निर्वहन विधान के नियम तथा समय-समय पर कार्यकारिणी समिति तथा आमसभा द्वारा जारी किये गये आदेशों के अधीन रहते हुए करेंगे।
26

विवादों का निपटारा :

सभा के अन्तर्गत उत्पन्न विवादों का निराकरण इस प्रकार होगा :

  • प्रथमा : समिति में प्रस्तुत चर्चा के द्वारा अगर निराकरण नही होता है तो।
  • द्वितीया : अध्यक्ष द्वारा मनोनीत तीन सदस्यों की समिति द्वारा सम्बंधित विवादों का जांच निराकरण करना।
  • तृतीया : रजिस्ट्रार या उसके द्वारा नियुक्त किसी अधिकारी को सभा से सम्बंधित विवादोण का अन्वेषण करने एवं उस पर निर्णय करने का पूर्ण अधिकार होगा। ऐसे अन्तिम होंगे वे सभी संबंधित पदों पर समान रुप से लागू होंगे। आवश्यकता पडने पर रजिस्ट्रार को प्रशासक नियुक्त करने का भी अधिकार होगा। उपरोक्त तीनों अवस्थाओं में निर्णय मान्य होंगे।

 

27 सदस्यता एवं पदों से संबंध विवादों का निर्णय
  • यदि यह विवाद उठा कि कोई व्यक्ति यथाविधि पदाधिकारी चुना गया है या नही तो वह निर्णय के लिये अध्यक्ष द्वारा मनोनीत तीन सदस्यों की समिति को अभिदिष्ट किया जायेगा और इस विषय में उसका निर्णय अंतिम होगा।
  • कार्यकारिणी सभा आदेश दे सकती है कि विचाराधीन विवाद की अवधि में कौन विवादास्पद पद से सम्बद्ध अधिकारोंका प्रयोग एवं कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।
  • विधान की धारा 31 (1) तथा 31 (2) में समिति तथा प्रतिनिधि सभा के विवाद ही सम्मिलित हैं।
  • अन्य किसी प्रकार के विवाद कार्यकारिणी की द्वारा निर्णित होंगे।

 

28

विधान की धारा की व्याख्या : यदि किसी स्थान पर विधान की घ्भाषा में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो कार्यकारिणी द्वारा दी गई व्याख्या सर्वमान्य होगी।

29

विधान में परिवर्तन : विधान में परिवर्तन , संशोधन, किसी किसी नियम को निकालने एवं नियमों को जोडने का अधिकार कार्यकारिणी समिति को आम सभा का निर्णय का निर्णय अपने पक्ष में लेकर होगा। किन्तु यह परिवर्तन रजिस्ट्रार, छत्तीसगढ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973  के पूर्वानुमोदन के बिना प्रभावी नही होगा।

30 विघटन : यदि सभा के 3/5 सदस्य बहुमत से उसी कार्य के लिए बुलाई गई आम सभा में क्षत्रिय सभा का विघटन का निर्णय लेते हैं तो सभा का विघटन कर दिया जाएगा। सभा के विघटन के पश्चात यदि सभा के सभी ऋण, उस देन दारी का भुगतान करने के पश्चार कोई धन या सम्पत्ति बाकी बचती है तो उसकाबटवारा सदस्यों के बीच नही होगा। परन्तु विघटन के समय उपस्थित सदस्यों 3/5 बहुमत से ऐसी संपत्ति उनके द्वारा निर्धारित समान अद्देश्य वाली अन्य संस्था को दे दी जाएगी।
31 दस्तावेज आदि प्रस्तुत करना : सभा छत्तीसगढ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973  की धारा 27, 28 एवं निहित दस्तावेज निर्धारित समय में रजिस्ट्रार आफ़ फ़र्म्स एवं सोसायटी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।